मन मेरा आखदा शेरेआलिये इकवारी दर्श दिखा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मन मेरा आखदा शेरेआलिये,

इकवारी दर्श दिखा,

ओ दातिये इक वारी दर्श दिखा,

शेरांवालडिये ओ मेहरावालडिये,

शेरांवालडिये ओ मेहरावालडिये,

मन मेरा आखदा शेरेआलिये......

विच पहाड़े मंदिर तेरा लाया ही भगते डेरा,

लाया ही भगते डेरा, लाया ही भगते डेरा,

भेंटा गाई-गाई नचदे ने सारे करदे ने दर्शन तेरा,

करदे ने दर्शन तेरा, करदे ने दर्शन तेरा,

लांदे जयकारे भेंटा वी गांदे इक वारी फेरा पा,

ओ दातिये इक वारी फेरा पा,

मन मेरा आखदा शेरेआलिये......

अंदर मैया तेरी ज्योत चमकदी बाहर पवे लिशकारा,

बाहर पवे लिशकारा, बाहर पवे लिशकारा,

जय जय मैया शेरेआली लांदे लोग जयकारा,

लांदे लोग जयकारा, लांदे लोग जयकारा,

झोलियां तू भरनी दुखड़े तू हरनी मेरे वी कष्ट मिटा,

ओ दातिये मेरे वी कष्ट मिटा,

मन मेरा आखदा शेरेआलिये......

पापीगे तू पले च मारे, चंडी दा रूप बनाइये,

चंडी दा रूप बनाइये, चंडी दा रूप बनाइये,

भगतेगी तू करे जे तारे वैष्णों दा रूप बनाइये,

वैष्णों दा रूप बनाइये, वैष्णों दा रूप बनाइये,

असी वी तारी जा शेरेआलिये इक वारी तू सामने आ,

ओ दातिये इक वारी तू सामने आ,

मन मेरा आखदा शेरेआलिये......

सावन महीना आई गया माँ दा असे प्रीता लाईया,

असे प्रीता लाईया, असे प्रीता लाईया,

भगतेगी तुगी याद ना आई लमिया तरीका पाईया,

लमिया तरीका पाईया, लमिया तरीका पाईया,

नरातेयां च लगदा मेला नी दातिये,

मने आला मुखटा रिझा,

ओ दातिये मने आला मुखटा रिझा,

मन मेरा आखदा शेरेआलिये......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।