सुनले फरयाद साईं

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

सुनले फरयाद साईं मैं तेरे चरणों में आया,

सारा जग देख लिया है तेरे चरणों में आया,

एक नजर देखले जीने का इशारा देदे,

मैं फसा ववर में साईं किनारा देदे,

तू ही पातवर है आके साईं तू पार लगा,

सारा जग देख लिया है .........

तेरे चरणों में चारो धाम है

तू मुक्ति दाता वीरो का वीर है तू जग तेरा यश गान गाता,

राजा और रंक में भी चरणों में शीश झुकाया

सारा जग देख लिया है....

तेरे ही नूर से रोशन है ये जीवन हमारा,

तेरे ही रहम कर्म से ये संसार सारा,

मेहता मासूम है करदे आचल का साया,

सारा जग देख लिया है ........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।