लगियाँ ने मौजाँ लगाईं रखीं दातीऐ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

लगियाँ ने मौजाँ लगाईं रखीं दातीऐ,

लगियाँ ने मौजाँ लगाईं रखीं दातीऐ,

चँगे हाँ के मँदे हाँ निभाई रखीं दातीऐ,

चँगे हाँ के मँदे हाँ निभाई रखीं दातीऐ,

लगियाँ ने मौजाँ लगाईं रखीं दातीऐ.......

तेरा नाम लै के मैया शान मैं वी पाई ऐ,

तेरे हथ डोर ते आपे तू चढ़ाई ऐ,

चढ़ी होई गुड्डी नु चढ़ाईं रखीं दातीऐ,

चँगे हाँ के मँदे हाँ निभाई रखीं दातीऐ,

लगियाँ ने मौजाँ लगाईं रखीं दातीऐ......

किसे नु मैं अपना दुखड़ा सुनाया नहीं,

तेरे वाजों किसे मैंनु सीने नाल लाया नहीं,

सीने नाल लाया ऐ ते लाई रखीं दातीऐ,

चँगे हाँ के मँदे हाँ निभाई रखीं दातीऐ,

लगियाँ ने मौजाँ लगाईं रखीं दातीऐ......

जदों दा मैं चरणाँ दा बनया गुलाम हाँ,

लोकीं कहन्दे खास मैं ते आमाँ तों वी आम हाँ,

परदा जे पाया ऐ ते पाईं रखीं दातीऐ,

चँगे हाँ के मँदे हाँ निभाई रखीं दातीऐ,

लगियाँ ने मौजाँ लगाईं रखीं दातीऐ.......

नाम तेरा लैंदा रवाँ सुबह ते शाम मैं,

ऐदे नाल वद होर लैना की नाम मैं,

बनया मैं दास ते बनाईं रखीं दातीऐ,

चरणाँ दे नाल तू लगाईं रखीं दातीऐ,

चँगे हाँ के मँदे हाँ निभाईं रखीं दातीऐ,

लगियाँ ने मौजाँ लगाईं रखीं दातीऐ......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।