जगदम्बिके जय जय जगजननी माँ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन दुर्गा भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जगदम्बिके जय जय जगजननी माँ....

हे माँ ......हे माँ..... हे माँ ......हे माँ.....

जगदम्बिके जय जय जगजननी माँ,

हे माँ .........हे माँ .... हे माँ........हे माँ.....

श्री राम तू ही श्री कृष्ण तू ही,

श्री राम तू ही श्री कृष्ण तू ही,

दुर्गा काली श्री राधे तू ही,

हे मँ ........हे माँ ....हे माँ........

ब्रहमा विष्णु शकंर में तेरा माँ तेज समाया है,

जगदम्बिके जय जय जगजननी माँ,

जगदम्बिके जय जय जगजननी माँ,

हे माँ ...हे माँ ........ हे माँ...हे माँ,

जगदम्बिके जय जय जगजननी माँ....

मै जो पांऊ तुम से पांऊ, मै जो पांऊ तुम से पांऊ,

जो देंवे उसमे हरशाउँ कुछ रहे ना मेरा अपनापन,

है हर वक्त तेरा ही साया है,

जगदम्बिके जय जय जगजननी माँ,

हे माँ ...हे माँ ........ हे माँ...हे माँ,

जगदम्बिके जय जय जगजननी माँ......

क्या सोहणा रूप सुहाया है क्या सोहणा रूप सुहाया है

मै वारू तुझ पे तन मन माँ मेरे मन को ये भाया है

जगदम्बिके जय जय जगजननी माँ

हे माँ ...हे माँ ........ हे माँ...हे माँ,

जगदम्बिके जय जय जगजननी माँ.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।