सूरज है चमकता जब तक माँ तेरी पूजा करेगे तब तक माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सूरज है चमकता जब तक माँ तेरी पूजा करेगे तब तक माँ,

सूरज है चमकता जब तक माँ तेरी पूजा करेगे तब तक माँ,

ईक दिन तो तरस आयेगा तुम्हे तुम रुठी रहोगी कब तक माँ,

सूरज है चमकता जब तक माँ तेरी पूजा करेगे तब तक माँ......

किस्मत के पड़े चाँटे माँ हर ओर बिखर गये काँटे माँ,

फिर दामन छोड़ा ना तेरे चरणो से नाता जोड़ा माँ,

अब हाथ पकङ कर ले जाना माँ भक्ति के शिखर तक

सूरज है चमकता जब तक माँ तेरी पूजा करेगे तब तक माँ

ईक दिन तो तरस आयेगा तुम्हे तुम रुठी रहोगी कब तक माँ

सूरज है चमकता जब तक माँ तेरी पूजा करेगे तब तक माँ....

तुम ममता का निर्मल सागर हो तुम दाती माँ बङी दयालु हो,

तेरी करुणा नही सो सकती तू पत्थर दिल नही हो सकती,

ईक हम ही पे आके कब से खड़े तेरा अमृत पहुँचा सब तक माँ,

सूरज है चमकता जब तक माँ तेरी पूजा करेगे तब तक माँ,

ईक दिन तो तरस अायेगा तुम्हे तुम रुठी रहोगी कब तक माँ,

सूरज है चमकता जब तक माँ तेरी पूजा करेगे तब तक माँ......

तेरे सच्चे ही माँ दरबारो से तेरे दया के ही भण्डारो से,

ओ मनवांछित खुशीया सब को मिली जीवन की है गाड़ी सब की चली,

तेरे द्वारे पे धूणी रमाये हुऐ जो खाली रहे हम तो माँ,

सूरज है चमकता जब तक माँ तेरी पूजा करेगे तब तक माँ,

सूरज है चमकता जब तक माँ तेरी पूजा करेगे तब तक माँ......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।