मै तेरे बिना रह नही सकदा माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मै तेरे बिना रह नही सकदा माँ,

जुदाईया सह नही सकदा माँ,

मै तेरे बिना रह नही......

तेरे मन्दिरां ने वर दाती मोह लेया मन मेरा,

मोह लेया मन मेरा, मोह लेया मन मेरा,

दिल करदा शाम सवेरे पाँवा दर तेरे फेरा माँ,

पाँवा दर तेरे फेरा माँ, पाँवा दर तेरे फेरा माँ,

याद मेरी माँ तैनु आई.... हो ओ हो हो,

याद मेरी माँ तैनु आई तू मैनु खत पाया,

तू सदेया मै द्वार तेरे ते दौड़ा दौड़ा आया,

मै तेरे बिना रह नही.......

मेरे घर विच सदा ही तेरी जोत जगे महारानी,

ज्योत जगे महारानी, जोत जगे महारानी,

तेरे नाम दा माला फेरे हर ईक घर दा प्राणी,

हर ईक घर दा प्राणी, हर ईक घर दा प्राणी,

रीझा नाल मै घर विच तेरा... हो ओ हो हो,

रीझा नाल मै घर विच तेरा है मन्दिर बनवाया,

तू सदया मै द्वार तेरे ते दौङा दौङा आया,

मै तेरे बिना रह नही.......

कल तक जेहड़े सपने सी माँ अज सारे सच होये,

अज सारे सच होये, अज सारे सच होये,

सांनु अपनी सेवा बक्शी साढे पाप लकोऐ,

साडे पाप लकोऐ, साढे पाप लकोऐ,

अपने भक्ता दे घर हुण ते... हो ओ हो हो,

अपने भक्ता दे घर हुण ते माँ तू कर्म कमांया,

तू सदया मै द्वार तेरे दे दौड़ा दौड़ा आया,

मै तेरे बिना रह नही.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।