आज कोयल बोली रे सरस बन में

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

( बागा बोली कोयली, वन में बोल्यो मोर,

नवरात्रि को आयो त्यौहार, खुशी बरसे चहुं ओर,

सरस बन में, सरस बन में,

आज कोयल बोली रे सरस बन में।। )

झमराल्या रो बेटो मैया चतुर सुजान रे,

चतुर सुजान ओ मैया चतुर सुजान रे,

नंदन बन में नंदन बन में,

आज कोयल बोली रे सरस बन में....

किरसान्या रो बेटो मैया चतुर सुजान रे,

चतुर सुजान ओ मैया चतुर सुजान रे,

हमारे मन में तुम्हारे मन में,

आज कोयल बोली रे सभी के मन में.....

कौन ले आए मैया तोहरी चुनरिया,

भगत ले आए मैया तोहरी चुनरिया,

मैया ओढ़ रही रे मैया पहन रही रे,

आज कोयल बोली रे सरस बन में.....

।।डॉ सजन सोलंकी।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।