अगर मां ना होती

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जमाने में ममता की कीमत न होती,

अगर मां न होती अगर मां न होती,

बच्चों के जीवन में खुशियां न होती,

अगर मां न होती अगर मां न होती....

दुनियां में ममता की पहचान मां है,

मां से ही पैदा ये सारा जहां है,

मानव के जीवन की जलती न ज्योति,

अगर मां न होती अगर मां न होती......

नौ मास अपने उदर में छुपाया,

लगाकर कलेजे से दूध पिलाया,

सुखे में सुलाकर खुद,सूखे में सोती,

अगर मां न होती अगर मां न होती.....

गमे हाल दिल का कहे हम तो मां से,

करेंगे न शिकवा कभी झूठे जहां से,

बच्चो के दिल में मां की धड़कन न होती,

अगर मां न होती अगर मां न होती,

जमाने में ममता की कीमत न होती,

अगर मां न होती अगर मां न होती......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।