समय ना व्यर्थ गवा

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विविध भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

विषयों से मोड़ के मुखड़ा विषियो से,,

हरि नाम की ओढ़ दुसाल, समय ना व्यर्थ गवा,

अब चलना छोड़ कुचाल, समय ना व्यर्थ गवा।।

बीती जाए तेरी उमरिया जाए ढलती ये जवानियां,

जो करना है आज करो, कल पे ना विश्वास करो,

कब हो जाए जीवन की शाम हांये ये शाम,

तेरे ऊपर मंडराए काल,समय ना व्यर्थ गवा,

अब चलना छोड़ कुचाल.....

तीन राहों का जीवन तेरा चौथी राह तेरी शमशान है,

पहली राह बचपन की गई, दुजी राह यौवन की चली,

तीजी राह में जप हरि नाम हाए ये नाम,

बीते दिन महीने और साल, समय ना व्यर्थ गवा,

अब चलना छोड़ कुचाल.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।