परदे से निकल ऐ माँ कालका

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

पर्दे से निकल ए मां कालका, मुझे दर्शन तेरा करना है,

मां तू ही बता अब क्या मैं करूं, मुझे जीना है या मरना है....

मैं निर्धन हूं धनवान नहीं पर तुझसे मैं अनजान नहीं,

जिस हाल में मुझको रखोगी उस हाल में ही मुझे रहना है,

पर्दे से निकल ए मां कालका......

मझधार में नैया मेरी है तुम आकर संभालोगी इसको,

अब डूब लूंगा या पार लगू तेरे नाम सहारे तरना है,

पर्दे से निकल ए मां कालका......

तू सारे जगत की वाली है फिर मेरी क्यों झोली खाली है,

सोने चांदी की दुनिया में इस मतलब की यह दुनिया में,

तेरा नाम हमें ही सिमरना है,

पर्दे से निकल ए मां कालका......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।