ना झटको शीश से गंगा हमारी गौरा भीग जाएगी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ना झटको शीश से गंगा हमारी गौरा भीग जाएगी,

तुम्हारा कुछ ना बिगड़े हमारी गौरा रूठ जाएगी,

भोले के जटो में गंगा गौरा के माथे की बिंदिया,

यह दोनों एक हो जाये नज़ारा हम भी देखेंगे,

ना झटको........

भोले के गले में नाग गौरा के गले में हार,

यह दोनों एक हो जाये नज़ारा हम भी देखेंगे,

ना झटको........

भोले के हाथो में डमरू गौरा के हाथो की मेहँदी,

यह दोनों एक हो जाये नज़ारा हम भी देखेंगे,

ना झटको.......

भोले के संग में गौरा गौरा के गोद गणपत,

यह तीनो एक हो जाये नज़ारा हम भी देखेंगे,

ना झटको.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।