काली माँ ज्योत जगाई है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

काली माँ, ज्योत जगाई है,

सवाली बन दर पे आये है,

आये सर को मैं झुकाने,

तेरे दर पे हो मईया रानी।।

सुन्दर है तेरा भवन,

सुन्दर ये स्वरुप है,

कोटि कोटि तुम्हे मेरा प्रणाम है,

जो भी तेरे दर पे आया,

वो ना कभी खाली गया,

तुम्ही हो खप्पर वाली,

काली माँ, ज्योत जगाई है.....

विनती करो मंजूर, तेरी शरण आया हु,

बालक हु माँ मैं तेरा, तेरी शरण आया हु,

तेरी महिमा गाता हूँ, तुमसे आस लगाता हु माँ,

शान तेरी है निराली,

काली माँ, ज्योत जगाई है.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।