ग्यारस माता मेरे घर आइए

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ग्यारस माता मेरे घर आइए,

फिर तन्ने मैं अपना लूंगी.....

मेरी ड्योढ़ी पर पैर धरेगी,

फिर तन्ने शीश झुका दूंगी,

मेरे घर में चार कोने हैं,

चारों पर आसन लगा दूंगी,

मेरे घर में सासुल ससुरे,

तेरी उनसे सेवा करा दूंगी,

ग्यारस माता मेरे घर आइए,

फिर तन्ने मैं अपना लूंगी.....

मेरी ड्योढ़ी पर पैर धरेगी,

चरणों में शीश झुका दूंगी,

मेरे घर में चार कोने हैं,

चारों में आसन लगा दूंगी,

मेरे घर में जेठ जेठानी,

तेरी उनसे सेवा करा दूंगी,

ग्यारस माता मेरे घर आइए,

फिर तन्ने मैं अपना लूंगी.....

मेरी ड्योढ़ी पर पैर धरेगी,

चरणों में शीश झुका दूंगी,

मेरे घर में चार कोने हैं,

चारों में आसन लगा दूंगी,

मेरे घर में राजा रानी,

तेरी उनसे सेवा करा दूंगी,

ग्यारस माता मेरे घर आइए,

फिर तन्ने मैं अपना लूंगी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।