प्रेम का रूप विधाता

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

चंदन केसी कंठी माला,प्रेम बिना नहीं भाता।

प्रेम का रूप विधाता,प्रेम का रूप विधाता।।

प्रेम बिना भक्ति कहां, भक्त में शक्ति कहां,

प्रेम की महिमा प्रेम ही जाने, प्रेम का जो सुख पावे,

प्रेम का पुंज लगावे,

सूरत मूरत तीरथ पानी,सब है भरम के दाता,

प्रेम का रूप विधाता...

गिद्ध सबरी प्रह्लाद, प्रेम का पाया प्रसाद,

प्रेम मगन मन तन मन अर्पण, दर्शन को ललचाए,

प्रेम के आंसू बहाए,

मंदिर मज्जित और गुरुद्वारा,प्रेम सदा दर्शाता,

प्रेम का रूप विधाता.....

चंदन केसी कंठी माला,प्रेम बिना नहीं भाता।

प्रेम का रूप विधाता,प्रेम का रूप विधाता।।

।।डॉ सजन सोलंकी।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।