माँ आ जाना जब जब याद करें

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आना माँ आ जाना जब जब याद करें हमें दर्श दिखा जाना,

ओ जब जब याद करें हमें दर्श दिखा जाना,

आना माँ आ जाना.......

तेरा दर है सुहाना माँ ओ तेरा दर है सुहाना माँ,

बस इक विनती है तेरा दर्शन पाना माँ,

ओ बस इक विनती है तेरा दर्शन पाना माँ.....

चलो भक्तों चलो माँ के द्वारे कट जाएंगे पाप है सारे,

चलो भक्तों चलो माँ के द्वारे कट जाएंगे पाप है सारे.....

हमें ना ठुकराना माँ....-2

माँ और बेटे का नाता है पुराना माँ......-2

हमें भूल ना जाना माँ.....-2

तुम नही भूलना माँ चाहे भूले जमाना माँ.....-2

माँ का द्वार निराला है......-2

ओ दर्शन जो करता वो किस्मत वाला है.......-2

माँ की गुफा न्यारी है......-2

ओ जगमग ज्योत जगती लगती सबको प्यारी है......-2

माँ के दर के नजारे है......-2

ओ सारे भगतो के माँ ने काज सवारे है......-2

माँ मंदिरों से आई है.......-2

दर्शन दे दो मैया जी हमने आस लगाई है......-2

माँ की गुफा सुहानी है......-2

ओ जो यहां राज करे वो पिंडी रानी है......-2

माँ पीला शेर सवारी है.......-2

ओ लाखों के भंडार भरे अब हमारी बारी है......-2

आना माँ आ जाना,

जब जब याद करें हमें दर्श दिखा जाना,

ओ जब जब याद करें हमें दर्श दिखा जाना.....

जरा प्रेम से बोलो, जय माता दी,

ओ सारे बोलो, जय माता दी,

आवाज नही आई, जय माता दी,

अगले भी बोलो, जय माता दी,

पिछले भी बोलो, जय माता दी,

ओ माँ नही सुनेया, जय माता दी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।