आवां नी आंवा तेरे द्वार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आवां नी आंवा तेरे द्वार, माँये नी तेरे मन्दिरां विच आंवा,

लै के फुला दे हार, माँये नी तेरे मन्दिरा विच आंवा,

आंवा नी आँवां तेरे द्वार......

पान सुपारी ध्वजा नारियल, ध्वजा नारियल ध्वजा नारियल,

ओह झण्डेवाली सरकार, मांये नी तैनु भेटं चढा़वा,

आंवा नी आँवां तेरे द्वार......

नौ रगं चोला अगं विराजे, अगं विराजे अगं विराजे,

माँ चुनी दा रगं सुआं लाल, मांये नी तेरे सिर ते सजांवा,

आंवा नी आँवां तेरे द्वार......

हलवा पूड़ी किशमिश मेवा, किशमिश मेवा किशमिश मेवा,

हो जग दी पालनहार, मांये नी तेनु भोग लगावा,

आंवा नी आँवां तेरे द्वार......

चचंल पे माँ कृपा किजौ, बच्चो पे माँ कृपा किजौ,

कृपा किजौ कृपा किजौ, दे चरणां दा प्यार,

माँये नी तेरीया भेटां गांवा, आंवा नी आँवां तेरे द्वार......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।