बह जा जोगी दे दर तू जाके

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

बह जा जोगी दे दर तू जाके,

जे जोगी दा नजारा देखना,

अपने मन नू जोगी चरणों से लगा के,

जे जोगी दा नजारा देखना......

इस दुनिया ने जीन तैनू देना नहीं,

प्याला सबरा दा पीन तैनू देना नहीं,

धूना बाबा जी दे नाम वाला ला के,

जे जोगी दा नजारा देखना,

बह जा कुली तू जंगल विच पा के......

मोह माया वाले बंधना नू तोड़ के,

ओ साहा वाली डोर जोगी नाल जोड़ के,

सच्चे नाम वाली ज्योत जगा के,

जे जोगी दा नजारा देखना,

बह जा कुली तू जंगल विच पा के......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।