आँसुओं से है भीगा दामन मेरा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आँसुओं से है भीगा दामन मेरा,

खुशियों के खजाने की मालिक हो तुम,

आँसुओ से है भीगा दामन मेरा,

खुशियों के खजाने की मालिक हो तुम,

थोड़ी सी खुशी मुझे दे दो तुम,

मैया सारे जमाने की मालिक हो तुम,

आँसुओ से है भीगा दामन मेरा......

इक बार जो दर तेरे आ जाये,

उस भक्त की झोली भर जाये,

इक बार जो दर तेरे आ जाये,

उस भक्त की झोली भर जाये,

सांसो की तुम्ही से सरगम है,

जीवन के तराने की मालिक हो तुम,

आँसुओ से है भीगा दामन मेरा.......

तुम अम्बर हो मैं तारा हूं,

जैसा हूँ दास तुम्हारा हूं,

तुम अम्बर हो मैं तारा हूं,

जैसा हूँ दास तुम्हारा हूं,

मुझे भूखा रख या रोटी दे,

मैं पंछी हूँ दाने की मालिक हो तुम,

आँसुओ से है भीगा दामन मेरा......

आँसुओ से है भीगा दामन मेरा,

खुशियों के खजाने की मालिक हो तुम,

थोड़ी सी खुशी मुझे दे दो तुम,

मैया सारे जमाने की मालिक हो तुम,

आँसुओ से है भीगा दामन मेरा,

आँसुओ से है भीगा दामन मेरा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।