मेरा कौन आसरा था तेरी बन्दगी से पहले

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरा कौन आसरा था तेरी बन्दगी से पहले,

मै तुम्हे ही ढुढंता था इस जिन्दगी से पहले,

मेरा कौन आसरा था तेरी बन्दगी से पहले......

मै तो खाक का था दर्रा मेरी ओर क्या थी हस्ती,

मै तो डगमगा रहा था तुफा मे जैसे कष्टी,

दर दर भटक रहा था तेरी बन्दगी से पहले,

मै तुम्हे ही ढुढता था इस जिन्दगी से पहले,

मेरा कौन आसरा था तेरी बन्दगी से पहले......

तू जो महेराबाँ हुई तो सारा जग महेरबाँ है,

ये जमीं महेरबाँ है आसमाँ भी महेराबान है,

मजा जिन्दगी क्या था तेरी बन्दगी से पहले,

मै तुम्हे ही ढुढंता था इस जिन्दगी से पहले,

मेरा कौन आसरा था तेरी बन्दगी से पहले.......

तेरी करुणा भी बङी है तेरी हस्ती भी बड़ी है,

माँ केवल कृपा की दृष्टी इस झोली पे पड़ी है,

मै तो करता ही बुरा था तेरी बन्दगी से पहले,

मै तुम्हे ही ढुढंता था इस जिन्दगी से पहले,

मेरा कौन आसरा था तेरी बन्दगी से पहले......

मै था इस जहाँ मे जैसे खाली है सिप होती,

मेरी पङ गई है कीमत तूने भर दिया जो मोती,

मेरा साया तक जुदा था तेरी बन्दगी से पहले,

मै तुम्हे ही ढुढंता था इस जिन्दगी से पहले,

मेरा कौन आसरा था तेरी बन्दगी से पहले......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।