रन चण्डी महाकाली कालका

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

रन चण्डी महाकाली कालका,

जद रण अंदर वार करे,

जय काली प्रचंड ज्वाला दुष्टा दा संघार करे,

जय काली प्रचंड ज्वाला दुष्टा दा संघार करे,

रन चण्डी महाकाली कालका.......

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

जल थल गगन मंडल हिल जावे,

जद हुँकार माँ काली लावे,

काल रूप तक थर-थर कमदे,

असुर दैत्य पानी ना मंगदे,

असुर दैत्य पानी ना मंगदे,

खड़क चक्कर त्रिशूल मैया दा....हो,

खड़क चक्कर त्रिशूल मैया दा,

ईको विच मसल दले,

जय काली प्रचंड ज्वाला दुष्टा दा संघार करे,

जय काली प्रचंड ज्वाला दुष्टा दा संघार करे,

रन चण्डी महाकाली कालका......

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

माँ शक्ति माँ सिंहवाहिनी,

अष्ट भवानी पाप नाशिनी,

अक़्ल चण्डिका सिद्धकालिका माँ,

दानवदल नु दलन वाली माँ,

दानवदल नु दलन वाली माँ,

नरमुण्ड दल विच तांडव नाचे....हो

नरमुण्ड दल विच तांडव नाचे,

काल भैरव भी प्राण हरे,

जय काली प्रचंड ज्वाला दुष्टा दा संघार करे,

जय काली प्रचंड ज्वाला दुष्टा दा संघार करे,

रन चण्डी महाकाली कालका....

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

पाप जंजाल विकार मुकावे,

दुर्गा धारी रूप धरावे,

भगतजना दी सदा सहाई,

जय अम्बे जय कालका माई,

जय अम्बे जय कालका माई,

सब दियां रखे मने माँ....हो,

सब दियां रखे मने माँ,

सब दियां झोलिया रोज भरे,

जय काली प्रचंड ज्वाला दुष्टा दा संघार करे,

जय काली प्रचंड ज्वाला दुष्टा दा संघार करे,

रन चण्डी महाकाली कालका......

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।