मेरी दाती दया हर इक ते करदी ए

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरी दाती दया हर इक ते करदी ए,

भगता दे भंडार भवानी भरदी ए,

मेरी दाती दया हर इक ते करदी ए.......

हे अष्ट भुजा माँ अम्बे हे ऊँचेया मंदिरा वाली,

हे मैया आदकुवारी जय हो ज्वाला महाकाली,

रूप कई, रूप कई, रूप कई धरदी ए,

भगता दे भंडार भवानी भरदी ए,

मेरी दाती दया हर इक ते करदी ए......

ऐसे दी महिमा गा गा ब्रहमा ने वेद बनाये,

शिव शंकर इंद्र विष्णु सब ऐसे ने उपजाये,

ओ रक्षा, ओ रक्षा, ओ रक्षा करदी ए,

भगता दे भंडार भवानी भरदी ए,

मेरी दाती दया हर इक ते करदी ए......

दुखिया दे दुख मिट जांदे,

जय जय, जय माता दी कहके,

सच जानो पौणावाली मईया दा ही ना लैके,

ओ दुनिया, ओ दुनिया, ओ दुनिया डरदी ए,

भगता दे भंडार भवानी भरदी ए,

मेरी दाती दया हर इक ते करदी ए......

ए दुष्ट संघारन वाली ऐ ते खंडे नु हथ पावे,

ए पृथ्वी थर थर कम्मे तद परले ही हो जाए,

जदो ए, जदो ए, जदो ए लड़दी ए,

भगता दे भंडार भवानी भरदी ए,

मेरी दाती दया हर इक ते करदी ए......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।