माता कालका रक़्ते दी तरयाई

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

कलकत्तेयां चलिए आई कालका रक़्ते दी तरयाई,

कलकत्तेयां चलिए आई कालका रक़्ते दी तरयाई,

अखां माता दियां बनण मसाला गज-गज लाली छाई,

अखां माता दियां बनण मसाला गज-गज लाली छाई,

तेरी जय होवे जम्मू आली काली माता तेरी जय होवे,

तेरी जय होवे पहाड़े आली काली माता तेरी जय होवे,

तेरी जय होवे जम्मू आली काली माता......

बड़ी मुंडिया गले ते पैन्दी लैंदी हार बनाई,

हो बाहीं माता दे नैंत सोभदा तुलसी ठिकरे लाई,

तेरी जय होवे जम्मू आली काली माता.......

सवा मन्ना दा खप्पर मैया दा ओ भी भरौंदा नाही,

सवा मन्ना दा खप्पर मैया दा ओ भी भरौंदा नाही,

तेरी जय होवे जम्मू आली काली माता.......

विच्च जम्मुआ दे बहुलोचन ने आंदी कालका माई,

बाहु किले विच्च आनी राजे ने मन्दर लया बनाई,

करी थापना बौन्दा राजा पूजा नित्त रचाई,

ऐ मंगलवार आ जगन रचौन्दा औंदी संगत सारी,

तेरी जय होवे जम्मू आली काली माता......

विच्च कटड़े दे वसदी वैष्णो जम्मू कालका माई,

विच्च कटड़े दे वसदी वैष्णो जम्मू कालका माई,

तेरी जय होवे जम्मू आली काली माता......

सुंदर भवन माता बनेया उच्चे पहाड़े जाई,

दूरा दूरा दा संगता औंदीयां जय- जयकार बुलाई,

तेरी जय होवे जम्मू आली काली माता....

सुखना माता करदी पुरीयां दिंदी काज बनाई,

हस्सी-हस्सी दर्शन देओ मेरी माता सारी संगत आई,

तेरी जय होवे जम्मू आली काली माता.......

औंदीयां संगता चढ़न चढाईयां बौड़ कालका माई,

जो किछ मंगदे सो किछ मिलदा दिंदी वेल बधाई,

तेरी जय होवे जम्मू वाली काली माता.......

मावें गी ओ पुत्र दिंदी भैने गी वीर मिलाई,

भुख्खे गी रौज भोजन मिलदा नंगे गी वस्त्र लाई,

ऐ सच्चे वचन थोआडे माता अम्रत कथा सुनाई,

तेरी जय होवे जम्मू वाली काली माता.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।