मेरा कलेया नी लगदा जी मेरे घर आ माता

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आ माता आ माता आ माता घर आ माता,

आ माता आ माता आ माता घर आ माता....

मेरा तेरे बिन लगदा ना जी मेरे घर आ माता,

मेरा कलेया नी लगदा जी मेरे घर आ माता आ माता,

मेरा कलेया नी लगदा जी मेरे घर आ माता....

कुट कुट रोटियां मै चुरियाँ बनानी आ पावां देसी घी,

मेरे घर आ माता,

मेरा तेरे बिना लगदा ना जी मेरे घर आ माता......

जम्मु शहर तों गऊआं मगांनी आं,

मै चोवां तू पी, मै चोवां तू पी मेरे घर आ माता,

मेरा तेरे बिना लगदा ना जी मेरे घर आ माता......

कोरे कोरे कुजेआं मैं दही जमांनी आ,

मै रीड़कां तू पी, मै रीड़कां तू पी मेरे घर आ माता,

मेरा तेरे बिना लगदा ना जी मेरे घर आ माता......

जम्मु शहर तो चुड़ीयां मगांनी आ,

चोला वी रखेया सी, चोला वी रखेया सी,

मेरे घर आ माता मेरा तेरे बिना लगदा ना जी,

मेरे घर आ माता......

आ माता असी दुख सुख फोलीऐ,

खुश कर लईए जी हाय खुश कर लईए जी,

मेरे घर आ माता,

मेरा तेरे बिना लगदा ना जी मेरे घर आ माता.......

आ माता मेरी शेरावाली आ माता,

मेरी ज्योतावाली आ माता मेरी लाटावाली आ माता पहाड़ा वाली,

तू माता मै धी हाय तू माता मै धी मेरे घर आ माता,

मेरा तेरे बिना लगदा ना जी मेरे घर आ माता......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।