सजा कर शेर मेरे घर आ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सजा कर शेर मेरे घर आ,

सजा कर शेर मेरे घर आ,

सजा कर शेर मेरे घर आ,

मै बैठा दिल का आसन सजा,

सजा कर शेर मेरे घर आ,

सजा कर शेर मेरे घर आ......

मन का आसन कबसे है खाली,

आन विरोजो माँ मन्दिरो वाली,

तुम बिन ओर बसे ना कोई,

मेरे मन मंदिर में आ,

सजा कर शेर मेरे घर आ,

सजा कर शेर मेरे घर आ.....

पाप मिटा दो गिन गिन मेरे,

काम क्रोध में लाये डेरे,

अवगुण मेरे चित ना बसाओ,

दो चरणो मे जगह,

सजा कर शेर मेरे घर आ,

सजा कर शेर मेरे घर आ....

लग जाये मेरी ऐसी समाधी,

मन में रहे ना कोई व्याधी,

हर पल तेरा नाम जपु मै,

ऐसी करो कृपा,

सजा कर शेर मेरे घर आ,

सजा कर शेर मेरे घर आ.....

कण कण दर्शन करू तुम्हारा,

रोम रोम बोले जयकारा,

ध्यानु सा विश्वास जगा दो,

हम पे करो कृपा,

सजा कर शेर मेरे घर आ,

सजा कर शेर मेरे घर आ.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।