मन के बहकावे में ना आ मन

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॥ पावन पाठ ॥

मन के बहकावे में ना आ

मन राह भुलाये भ्रह्म में डाले,

तू इस मन का दास ना बन,

इस मन को अपना दास बनाले,

तू इस मन.....

जूठी काया जूठी माया,

जूठा जग सब ध्यान हटाले,

पल भर के सब संगी साथी,

एक ईश्वर का नाम रटाले,

तू इस मन.......

सुख- दुःख हे सब मन के खिलोने,

इस मन को तू आज बताले,

खोया न रे वस् मन के भरोसे,

विषियो से वैराग करा ले,

तू इस मन.....

मन के चलत हे जो भी प्राणी,

अंत समय सब दुःख ही पाते,

ऐसा सतगुरु मन के बनाले,

जो आवा गमन सब आप,

तू इस मन.....

भ्रह्म का ध्यान पड़े मन के जब,

बुद्धि चित प्रभु प्रेम जगाले,

धरम तंवर ये कहते हे भाई,

मन की चाल समज नी पाई,

तू इस मन.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।