जय हो गिरिराज प्यारे की

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सात कोस बारे मतवारे,

ब्रज पति ब्रज रखवारे की,

जय हो गिरिराज प्यारे की,

जय हो गिरिराज र्‍यारे की.....

मोर मुकुट शीश विराजे,

गल वैजयंती माला साजे,

काम देव भी देख लाजवे,

शोभा ठाकुर प्यारे की,

जय हो गिरिराज प्यारे की,

जय हो गिरिराज प्यारे की.....

हाथ लकुटिया बीट झाकुलिया,

अधर विराजे मधुर मुरलिया,

पायन में बाजे पयालिया,

ओ झनक झनक झंकारे की,

जय हो गिरिराज प्यारे की,

जय हो गिरिराज प्यारे की.....

गिरिराज धरन प्रभु तेरी शरण,

प्रभु तेरी शरण प्रभु तेरी शरण,

प्रभु तेरी शरण गिरिराज धरणी,

जय हो गिरिराज प्यारे की,

जय हो गिरिराज प्यारे की....

सात दिन पानी बरसयो,

एक बूंद नहीं ब्रज में आओ,

डर कर इंद्र शरण में आयो,

श्री पति नंद दुलारे की,

जय हो गिरिराज प्यारे की,

जय हो गिरिराज प्यारे की.....

सात कोश वारे मतवेयर,

ब्रज पति ब्रज रखवारे की,

जय हो गिरिराज प्यारे की,

जय हो गिरिराज प्यारे की.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।