चल मिल आएं एक बार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मंदिर में बैठी मैया,

मैया जगत खिवैया,

जो करती बेड़ा पार,

चल मिल आएं एक बार,

चल मिल आएं एक बार,

चल भक्ता मंदिर चलिए,

माता के मंदिर चलिए....

मंदिर भवन सजी पताका,

सिंघासन बैठी सजी शलाका,

लाल चूनर है सिंगार,

चल मिल आएं एक बार,

चल मिल आएं एक बार,

चल भक्ता मंदिर चलिए,

माता के मंदिर चलिए......

बोल मां के सच्चे मोती,

नैनों में जगमग ज्योति,

करती दूर अंधकार,

चल मिल आएं एक बार,

चल मिल आएं एक बार,

चल भक्ता मंदिर चलिए,

माता के मंदिर चलिए......

मां करती सिंह सवारी,

रहती दुष्ट दलन पे भारी,

करती पापी का संघार,

चल मिल आएं एक बार,

चल मिल आएं एक बार,

चल भक्ता मंदिर चलिए,

माता के मंदिर चलिए......

श्रद्धा भाव हो जो मन में,

मैया दुख दूर करेगी क्षण में,

कृपा पानी हो जो अपार,

राजीव चल मिल आएं एक बार,

चल मिल आएं एक बार,

चल भक्ता मंदिर चलिए,

माता के मंदिर चलिए......

©राजीव त्यागी नजफगढ़ नई दिल्ली

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।