शिव की नगरिया मन्न भा गयी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

बरसे बड़रिया हौले हौले,

(हौले हौले)

दर्शन को मन मेरा डोले,

(मेरा डोल)

बरसे बड़रिया हौले हौले,

(हौले हौले)

दर्शन को मन मेरा डोले,

तेरी नगरिया मन भा गई,

शिव की डगरिया मन भा गई.....

बरसे बड़रिया हौले हौले,

(हौले हौले)

दर्शन को मन मेरा डोले,

(मेरा डोल)

बरसे बड़रिया हौले हौले,

(हौले हौले)

दर्शन को मन मेरा डोले....

तेरी नगरिया मन भा गई,

(तेरी नगरिया मन भा गई)

चारणों में ध्यान लगाउंगा,

तेरा ही गुण बाबा गौंगा,

सोया नसीबा जगनगा,

दार से तेरे मैं ना जाउंगा,

बाबा कर दो करम,

तोदो ना भरम,

भोले जान लो तुम,

मेरे दिल का मरहम...

तू ही नसीबा खोले खोले,

(खोले खोले)

दुखड़े मिटाओ मेरे भोले,

(मेरे भोले)

तू ही नसीबा खोले खोले,

(खोले खोले)

दुखड़े मिटाओ मेरे भोले,

तेरी नगरिया मन भा गई,

(तेरी नगरिया मन भा गई)

(जय हो जय हो)

गिरतो को तू ही उठा है,

भटको को रास्ता दिखता है,

बड़ी हर बात बना है,

दुनिया को पार लगता है,

धरती अंबर में तू,

और समंदर में तू,

पूजा सारा जहां,

दिल के मंदिर में तू,

दिल का पपीहा बोले बोले,

(बोले बोले)

दया के सागर मेरे भोले,

(मेरे भोले)

दिल का पपीहा बोले बोले,

(बोले बोले)

दया के सागर मेरे भोले,

तेरी नगरिया मन भा गई,

(तेरी नगरिया मन भा गई)

बरसे बड़रिया हौले हौले,

(हौले हौले)

दर्शन को मन मेरा डोले,

(मेरा डोल)

बरसे बड़रिया हौले हौले,

(हौले हौले)

दर्शन को मन मेरा डोले,

तेरी नगरिया मन भा गई,

तेरी नगरिया मन भा गई....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।