देखूं जहाँ जहाँ मैं तू ही तू है माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

देखूं जहाँ जहाँ मैं, इक तेरा ध्यान आये,

जाऊं जहाँ जहाँ मैं, इक तू ही नज़र आये,

तू ही तू है तू ही तू है तू ही तू है माँ,

तू ही तू है तू ही तू है तू ही तू है माँ,

हर शै में तू है समाई, ये सृष्टि तुमने रचाई,

क्या करूँ तुम्हारी बढ़ाई, सब पर किरपा बरसाई,

तू ही तू है तू ही तू है तू ही तू है माँ,

तू ही तू है तू ही तू है तू ही तू है माँ.....

रिपुदल मर्दिनी, पाप संहर्णि, देव करें तेरी पूजा,

देव करें तेरी पूजा देव करें तेरी पूजा,

हर संकट को हरनेवाली, तुझसा नहीं की कोई दूजा,

तुझसा नहीं कोई दूजा तुझसा नहीं कोई दूजा,

सदा सहाई और ना कोई , सदा सहाई और ना कोई,

हर पल, हर क्षण क्षण में,

तू ही तू है तू ही तू है तू ही तू है माँ,

तू ही तू है तू ही तू है तू ही तू है माँ.....

तू जिसको भी चाहे, वो भवसागर से तर जाये,

वो भवसागर से तर जाये, वो भवसागर से तर जाये,

ना कोई उसको चिन्ता, जो तेरी शरण में आये,

जो तेरी शरण में आये, जो तेरी शरण में आये,

वो तर जाये, तुम्हें बसा ले,

वो तर जाये, तुम्हें बसा ले,

जो अपने तन मन में,

तू ही तू है तू ही तू है तू ही तू है माँ,

तू ही तू है तू ही तू है तू ही तू है माँ.....

तुझको कहां कहां ढूँढेँ माँ भक्त तेरे इस जग में,

माँ भक्त तेरे इस जग में, माँ भक्त तेरे इस जग में,

तू जिसको चाहे वो देखे तुझको अपने मन में,

वो देखे तुझको अपने मन में, देखे तुझको अपने मन में,

तुम्हीं समाई हो नभ में, माँ तुम्हीं समाई हो नभ में,

और धरती के कण कण में,

तू ही तू है तू ही तू है तू ही तू है माँ,

तू ही तू है तू ही तू है तू ही तू है माँ.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।