जगत में उनकी मिटी है चिन्ता

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जगत में उनकी मिटी है चिन्ता,

जो तेरे चरणो मे आ गिरे है,

उन्ही के जीवन हरे भरे है,

जो तेरे चरणो मे आ गिरे है,

जगत में उनकी मिटी है चिन्ता....

ना तुम को पाया किसी ने बल से,

ना तुम को पाया किसी ने छल से,

पाया है तुमको क्षमा के जल से,

जो तेरे चरणो मे आ गिरे है,

जगत में उनकी मिटी है चिन्ता.......

ना तुम को पाया गरीब बनकर,

ना तुम को पाया अमीर बनकर,

पाया है तुमको शहीद बनकर,

जो तेरे चरणो मे आ गिरे है,

जगत में उनकी मिटी है चिन्ता......

ना तुमको पाया किसी ने तन से,

ना तुमको पाया किसी ने धन से,

पाया है तुमको इक सच्चे मन से,

जो तेरे चरणो मे आ गिरे है,

जगत में उनकी मिटी है चिन्ता......

ना तुमको पाया किसी ने गा कर,

ना तुमको पाया भेंट चढ़ा कर,

पाया है तुमको दिल से रिझाकर,

जो तेरे चरणो मे आ गिरे है,

जगत में उनकी मिटी है चिन्ता......

जगत में उनकी मिटी है चिन्ता,

जो तेरे चरणो मे आ गिरे है,

उन्ही के जीवन हरे भरे है,

जो तेरे चरणो मे आ गिरे है,

माँ जो तेरे चरणो मे आ गिरे है,

माँ जो तेरे चरणो मे आ गिरे है,

माँ जो तेरे चरणो मे आ गिरे है......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।