याद शेरांवाली तेरी आई

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

याद शेरांवाली तेरी आई दुनिया दी याद भूल गई,

आजा आजा हे महामाई दुनिया दी याद भूल गई,

याद शेरांवाली तेरी आई दुनिया दी याद भूल गई.......

मन दा पंछी उड़ उड़ जावे,

विच गमा दे गोते खावे,

तेरे वाजो कौन है मेरा, पावां तेरे दर ते फेरा,

आजा हुण आजा महामाई दुनिया दी याद भूल गई,

आजा आजा हे महामाई दुनिया दी याद भूल गई,

याद शेरांवाली तेरी आई दुनिया दी याद भूल गई......

ऐ जीना वी का दा जीना,

माँ दी रजा विच हरपल जीना,

तक तक राहवां थक गईया अखियाँ,

दुख दे हंजु हर पल पीवां,

लब लब हुई मैं शुदाई दुनिया दी याद भूल गई,

आजा आजा हे महामाई दुनिया दी याद भूल गई,

याद शेरांवाली तेरी आई दुनिया दी याद भूल गई......

औसियां पावां खैर मनावां,

रूसी होई माँ नु किवें मैं मनावां,

ईक वारी आजा मेरीए मायें,

पलका दा मैं फर्श बिछावां,

मुड़ मुड़ याद तेरी आई दुनिया दी याद भूल गई,

आजा आजा हे महामाई दुनिया दी याद भूल गई,

याद शेरांवाली तेरी आई दुनिया दी याद भूल गई......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।