झूठे जग ने लया मैनु लूट माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

झूठे जग ने लया मैनु लूट माँ मायें मेरी बाँह फड़ लै,

झूठे जग ने लया मैनु लूट माँ मायें मेरी बाँह फड़ लै,

गया अंदरो ही अंदर टूट माँ मायें मेरी बाँह फड़ लै,

झूठे जग ने लया मैनु लूट माँ....

दुख नित नवीयां खेडा पये ने खेडदे, इक पासे नही माँ चारे पासे घेरदे,

हंजु अखियां दे रहे नही रुक माँ मायें मेरी बाँह फड़ लै,

झूठे जग ने लया मैनु लूट माँ........

बच्चेया तो पीड़ा हुण जांदीया ना झल माँ, ओखा हुण लंगदा हर इक पल माँ,

ऐवें जाये ना जींद हुण रूल माँ, मायें मेरी बाँह फड़ लै,

झूठे जग ने लया मैनु लूट माँ....

वक्त दियां ठोकरा देन परेशानीयां, मन्देया नसीबा उते करन मनमानियां,

सुख पता नहियो किथे गये रुक माँ, मायें मेरी बाँह फड़ लै,

झूठे जग ने लया मैनु लूट माँ....

अंदरो ही अंदरी दिल मेरा टूटेया, इंज पया लगे जिवें साह हुण मुकेया,

मिटा दे झण्डेवाली जन्मा दी भूख माँ, मायें मेरी बाँह फड़ लै,

झूठे जग ने लया मैनु लूट माँ....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।