मुझे ऐसी लग्न तू लगा दे मै तेरे बिना पल ना रहूँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मुझे ऐसी लग्न तू लगा दे मै तेरे बिना पल ना रहूँ,

मईया ऐसी लग्न तू लगा दे मै तेरे बिना पल ना रहूँ,

मै तेरे बिना पल ना रहूँ, मै तेरे बिना पल ना रहूँ,

दिल में प्यार वाला दीप जगा दे मै तेरे बिना पल ना रहूँ,

मुझे ऐसी लग्न तू लगा दे....

दिल करता है दिल मे बसा लुं तुम्हे,

अपनी आखों में मैया छुपा लुं तुम्हे,

मेरे मन का अंधेरा मिटा दे मै तेरे बिना पल ना रहूँ,

मुझे ऐसी लग्न तू लगा दे....

जैसे जल बिना मछली पल ना जीऐ,

ऐसे तड़पूं मैं घड़ी घड़ी तेरे लिए,

मजा प्रेम वाला ऐसा चखा दे मै तेरे बिना पल ना रहूँ,

मुझे ऐसी लग्न तू लगादे....

तेरे चरणों की धूल में मैं मिल जाऊं,

अब आशा यहीं हैं कहीं दूर ना जाऊं,

ऐसा भक्ति का रंग चढ़ा दे मै तेरे बिना पल ना रहूँ,

मुझे ऐसी लग्न तू लगादे......

तूने अपना बनाया मैने कुछ ना कहा,

ला के दर पे बिठाया मैंने कुछ ना कहा,

अब ऐसी झलक दिखलादे मै तेरे बिना पल ना रहूँ,

मुझे ऐसी लग्न तू लगादे.......

दिल ये तेरी ही यादों धड़का में करे,

और ये धक-धक ना कहकर माँ माँ करे,

मैया अपने मे मुझको मिला ले मै तेरे बिना पल ना रहूँ,

मुझे ऐसी लग्न तू लगादे....

लाखों जिनकी कृपा से भवसागर तरे,

धूल जिनकी से सुख मुझको सारे मिले,

उन चरणों मे मुझको लगा दे मै तेरे बिना पल ना रहूँ,

मुझे ऐसी लग्न तू लगादे......

मै तेरे बिना पल ना रहूँ मुझे ऐसी लग्न तू लगादे,

मै तेरे बिना पल ना रहूँ दिल में प्यार वाला दीप जगादे,

मै तेरे बिना पल ना रहूँ मै तेरे बिना पल ना रहूँ,

मै तेरे बिना पल ना रहूँ मै तेरे बिना पल ना रहूँ.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।