सच्चे ना सही झूठे ही सही आखिर तो तेरे दीवाने हैं

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सच्चे ना सही झूठे ही सही, आखिर तो तेरे दीवाने हैं,

सच्चे ना सही झूठे ही सही, आखिर तो तेरे दीवाने हैं.....

पहले तो बनाया था अपना, फिर मुखड़ा कैसे मोड़ लिया,

लायक ना सही, जाहिल ही सही, आखिर तो तेरे दीवाने हैं,

सच्चे ना सही झूठे ही सही, आखिर तो तेरे दीवाने हैं......

इम्तिहान ना ले ना बेचैन ना, कर हैरान ना कर मां रहमत से,

दान ना सही नादान सही, आखिर तो तेरे दीवाने हैं,

सच्चे ना सही झूठे ही सही, आखिर तो तेरे दीवाने हैं......

पहले भी अब हम तो तारे हैं, फिर मुझ को कैसे छोड़ दिया,

साधक ना सही सेवक ही सही, आखिर तो तेरे दीवाने हैं,

सच्चे ना सही झूठे ही सही आखिर तो तेरे दीवाने हैं......

तुम आई नहीं मां जगदंबे, हम याद में रोते रहते हैं,

हंसते ना सही रोते ही सही, आखिर तो तेरे दीवाने हैं,

सच्चे ना सही झूठे ही सही, आखिर तो तेरे दीवाने हैं......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।