बना मन मंदिर आलीशान

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरे पूजन को हे माँ, बना मन मंदिर आलीशान,

तेरे पूजन को हे माँ, बना मन मंदिर आलीशान,

पड़ा तेरे चरणों मे हे माँ, मुझे भक्ति का दो वरदान,

पड़ा तेरे चरणों मे हे माँ, मुझे भक्ति का दो वरदान,

तेरे पूजन को हे माँ, बना मन मंदिर आलीशान.......

किस ने जानी तेरी माया किस ने भेद तेरा है पाया,

किस ने जानी तेरी माया किस ने भेद तेरा है पाया,

हारे ऋषि मुनि कर ध्यान, बना मन मंदिर आलीशान,

तेरे पूजन को हे माँ, बना मन मंदिर आलीशान,

पड़ा तेरे चरणों मे हे माँ, मुझे भक्ति का दो वरदान,

तेरे पूजन को हे माँ, बना मन मंदिर आलीशान......

किस ने देखी तेरी सूरत कौन बनावे तेरी मूरत,

किस ने देखी तेरी सूरत कौन बनावे तेरी मूरत,

तू है निराकार हे माँ, बना मन मंदिर आलीशान,

तेरे पूजन को हे माँ, बना मन मंदिर आलीशान,

पड़ा तेरे चरणों मे हे माँ, मुझे भक्ति का दो वरदान,

तेरे पूजन को हे माँ, बना मन मंदिर आलीशान.......

ये संसार है तेरा मंदिर तू ही रमी है इसके अंदर,

ये संसार है तेरा मंदिर तू ही रमी है इसके अंदर,

करते ऋषि मुनि सब ध्यान, बना मन मंदिर आलीशान,

तेरे पूजन को हे माँ, बना मन मंदिर आलीशान,

पड़ा तेरे चरणों मे हे माँ, मुझे भक्ति का दो वरदान,

तेरे पूजन को हे माँ, बना मन मंदिर आलीशान......

तू ही मन में, तू ही तन में तू ही बसी है सबके मन मे,

तू ही मन में, तू ही तन में तू ही बसी है सबके मन मे,

तू हर दिल मे है विराजमान, बना मन मंदिर आलीशान,

तेरे पूजन को हे माँ, बना मन मंदिर आलीशान,

पड़ा तेरे चरणों मे हे माँ, मुझे भक्ति का दो वरदान,

तेरे पूजन को हे माँ, बना मन मंदिर आलीशान......

तूने राजा रंक बनाये तूने छोटे बड़े बनाये,

तूने राजा रंक बनाये तूने छोटे बड़े बनाये,

तेरी लीला बड़ी महान, बना मन मंदिर आलीशान,

तेरे पूजन को हे माँ, बना मन मंदिर आलीशान,

पड़ा तेरे चरणों मे हे माँ, मुझे भक्ति का दो वरदान,

तेरे पूजन को हे माँ, बना मन मंदिर आलीशान.......

झूठे जग की झूठी माया मूर्ख इसमें क्यो भरमाया,

झूठे जग की झूठी माया मूर्ख इसमें क्यो भरमाया,

करले जीवन का कल्याण, बना मन मंदिर आलीशान,

तेरे पूजन को हे माँ, बना मन मंदिर आलीशान,

पड़ा तेरे चरणों मे हे माँ, मुझे भक्ति का दो वरदान,

तेरे पूजन को हे माँ, बना मन मंदिर आलीशान......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।