तेरे दर ते आके जगदम्बे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरे दर ते आके जगदम्बे कुछ याद सानु रहन्दा नही,

इस मन नु ठिकाना मिल जांदा,

ओ जेहड़ा ईक थां टिक के बैंदा नही,

तेरे दर ते आ के जगदम्बे...

तेरा द्वारा माँ सब तो निराला ए,

ऐदी जग विच कोई मिसाल नही,

ऐथे ऊंच नीच ते जाता दा,

कोई करदा भेद ते भाव नही,

ऐंथे ओ वी जी जी करदा ए,

ओ जेहड़ा गल किसे दी सहन्दा नही,

तेरे दर ते आ के जगदम्बे........

अज हर कोई एहियो कहन्दा ए,

ए सच्चा मैया द्वार तेरा,

हर घर विच तेरी महिमा ए,

हर कोई माँ लैंदा नाम तेरा,

ओ जिहनु नाम दा रंग है चढ़ जांदा,

ओ रंग माँ फेर उतरदा नही,

तेरे दर ते आ के जगदम्बे.......

तेरे द्वारे दे दर्शन करके माँ,

ए आँख छपकनी भूल जांदी,

ओ नही तकदा थकदा थकदा ओ,

जिहदे मन दी कुंडी खुल जांदी,

माँ तेरा विछोड़ा ऐसा है,

ओ तेरा बच्चडा कोई सहन्दा नही,

तेरे दर ते आ के जगदम्बे.......

साधक और योगी ऋषि मुनि,

तेरे दर ते शीश झुकान्दे ने,

माँ तेरे भक्त तेरे दर आउंदे ने,

ओ झोलिया भर के जांदे ने,

जीहनु भक्ति दा वर तू देनी ऐ,

ओ मुहो कुछ वी कैण्दा नही,

तेरे दर ते आ के जगदम्बे.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।