बीच भँवर में नाव है अटकी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बीच भँवर में नाव है अटकी,कर दे पार कन्हैया,

बन जा श्याम खेवैया,

अब तो हाथ बढ़ा मेरे बाबा, तुम ही चीर बढ़ैया,

बन जा श्याम खेवैया.....

टूटी हुई है नाव हमारी और पतवार नहीं है,

हारे के हो साथी बाबा बात ये बिलकुल सही है,

फिर क्यों मेरी डग-मग डग-मग डोल रही है नैया,

बन जा श्याम खेवैया......

आना है तो आजा साँवरा मत ना करियो देरी,

डूबेगी गर नाव हमारी होगी बदनामी तेरी,

टूटे ना विश्वास हमारा सुनले मुरली बजैया,

बन जा श्याम खेवैया......

कर दोगे गर मुझपे नजरे काम हमारा होगा,

दे दोगे गर मुझको सहारा नाम तुम्हारा होगा,

“ओम” कभी भूले ना तुमको सुनले मेरे कन्हैया,

बन जा श्याम खेवैया.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।