ईश्वर एक ही है

पारंपरिक
महादेव भजन विविध भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ईश्वर एक ही है पूजा अलग-अलग होती है......

ब्रह्मा को मना लो चाहे विष्णु को मना लो,

चाहे भोले पर दूध चढ़ा लो,

क्रिया एक ही है पूजा अलग-अलग होती है.......

काली को मना लो चाहे चंडी को मना लो,

चाहे दुर्गे पर चुनर उड़ा लो,

मैया एक ही है मूरत अलग-अलग होती है......

गंगा में नहा लो चाहे जमुना में नहा लो,

चाहे सरयू में गोता लगा लो,

जल तो एक ही है धारा अलग-अलग होती है......

गीता पढ़ लो चाय रामायण पढ़ लो,

पढ़-पढ़ के तुम अर्थ लगा लो,

भाषण एक ही है या अलग अलग होती है........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।