सुन अंजनी के लाल अंगूठी तोहे कहां पाई

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

सुन अंजनी के लाल अंगूठी तोहे कहां पाई,

कहां पाई तोहे कहां पाई,

सुन अंजनी के लाल अंगूठी तोहे कहां पाई.....

जनकपुरी में तुम्हें कभी नहीं देखा,

16 साल रेह आई, अंगूठी तोहे कहां पाई,

सुन अंजनी के लाल अंगूठी तोहे कहां पाई.....

अवधपुरी में तुम्हें कभी नहीं देखा,

जिस दिन से बिहा के आई, अंगूठी तोहे कहां पाई,

सुन अंजनी के लाल अंगूठी तोहे कहां पाई.....

पंचवटी में तुम्हें कभी नहीं देखा,

12 साल रह आई, अंगूठी तोहे कहां पाई,

सुन अंजनी के लाल अंगूठी तोहे कहां पाई.....

लंकापुरी में तुम्हें कभी नहीं देखा,

जिस दिन से मैं यहां आई, अंगूठी तोहे कहां पाई,

सुन अंजनी के लाल अंगूठी तोहे कहां पाई.....

तुम तो हनुमत छोटे बहुत हो,

कैसे करोगे लड़ाई, अंगूठी तोहे कहां पाई,

सुन अंजनी के लाल अंगूठी तोहे कहां पाई.....

फिर हनुमत ने बल दिखलाया,

सोने की लंका जलाई, अंगूठी तोहे कहां पाई,

सुन अंजनी के लाल अंगूठी तोहे कहां पाई.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।