धरती गाये साई राम

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन साईं भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

धरती गाये साई राम,

अम्बर गाये साई श्याम,

धरती गाये अम्बर गाये,

नदिया गाये सागर गाये,

महिमा शिर्डी धाम के,

महिमा शिर्डी धाम के,

हर दिशा में धूम मची है,

साई तुम्हारे नाम के,

साई तुम्हारे नाम के,

धरती गाये साई राम,

अम्बर गाये साई श्याम,

धरती गाये साई राम,

अम्बर गाये साई श्याम....

तेरे धूने की भबूती को,

जो माथे धारण कर लेते,

माथे धारण कर लेते,

जो माथे धारण कर लेते,

तेरे धूने की भबूती को,

जो माथे धारण कर लेते,

पाते रोगो से मुक्ति,

वो काया कुंदन कर लेते,

जो काया कुंदन कर लेते,

मिल जाती है नेहमत उनको,

मिल जाती है नेहमत उनको,

बिना मोल बिन दाम के,

बिना मोल बिन दाम के,

बिना मोल बिन दाम के,

धरती गाये साई राम,

अम्बर गाये साई श्याम,

धरती गाये साई राम,

अम्बर गाये साई श्याम......

तेरे दर रेहमतो की ही,

सदा बरसात होती है,

सदा बरसात होती है,

सदा बरसात होती है,

तेरे दर रेहमतो की ही,

सदा बरसात होती है,

वहाँ बेकार पत्थरो को,

बनाया जाता मोती है,

बनाया जाता मोती है,

तुम भक्तों को,

बाँटते दौलत,

तुम भक्तों को,

बाँटते दौलत,

सच्चे सुख आराम की,

सच्चे सुख आराम की,

सच्चे सुख आराम की,

धरती गाये साई राम,

अम्बर गाये साई श्याम,

धरती गाये साई राम,

अम्बर गाये साई श्याम.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।