लाओ लाओ हनुमान संजीवनी

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

लाओ लाओ हनुमान संजीवनी,

मेरा लक्ष्मण भ्राता जमीं पर पड़ा,

लाओ लाओ हनुमान संजीवनी,

मेरा लक्ष्मण भ्राता जमीं पर पड़ा,

श्री राम की आँखों से आंसू बहे,

उठ खड़ा हो तुझे श्री राम कहे,

तीनो लोकों में यूँ खलबली मच गई,

देखो अम्बर में है घनघोर घटा,

लाओ लाओं हनुमान संजीवनी,

मेरा लक्ष्मण भ्राता जमीं पर पड़ा,

मेघनाथ ने शक्ति चलाई ऐसी,

यूँ धरा पर पड़ा आज रघुकुलवंशी,

मैं भी मर जाऊँ सुन आज तेरे बिना,

मुझको उठ के तू जल्दी गले से लगा,

लाओ लाओं हनुमान संजीवनी,

मेरा लक्ष्मण भ्राता जमीं पर पड़ा,

इतनी सुनकर हनुमान उड़ने लगे,

जाके पर्वत पे फिर भयभीत हो गए,

माया फैली वहां पे थी लंकेश थी,

एक जैसा ही सबकुछ था दीखता वहां,

लाओ लाओं हनुमान संजीवनी,

मेरा लक्ष्मण भ्राता जमीं पर पड़ा,

पूरा पर्वत उठाके हनुमान जी,

झट लंका में पहुंचे थे बलवान जी,

देख हनुमान को सब उछलने लगे,

‘सोनू शर्मा’ कहे फिर लखन जी जगा,

लाओ लाओं हनुमान संजीवनी,

मेरा लक्ष्मण भ्राता जमीं पर पड़ा,

लाओ लाओ हनुमान संजीवनी,

मेरा लक्ष्मण भ्राता जमीं पर पड़ा,

लाओ लाओ हनुमान संजीवनी,

मेरा लक्ष्मण भ्राता जमीं पर पड़ा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।