ब्रज जन मन सुखकारी राधे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ब्रज जन मन सुखकारी राधे, श्याम श्यामा श्याम,

राधे श्याम

ब्रज जन मन सुखकारी राधे, श्याम श्यामा श्याम राधे,

हे कृष्ण करुणा-सिंधु, दीन-बन्धु जगत्पते,

गोपेश गोपिकाकान्त राधाकान्त नमोस्तुते....

तप्त कंचन गौरांगी, राधे वृंदा वनेसवरि,

वृष भानु सुते देवि प्रणमामि हरी प्रिये...

राधा कृष्ण मिली अब दोऊ, गौर रूप अवतारी,

कीर्तन धर्म प्रचारी, राधे श्याम श्यामा श्याम,

ब्रज जन मन सुखकारी राधे श्याम श्यामा श्याम राधे,

नारायण बलिहारी, राधे श्याम श्यामा श्याम राधे,

नारायण बलिहारी, राधे श्याम श्यामा श्याम राधे,

ब्रज जन मन सुखकारी राधे, श्याम श्यामा श्याम राधे,

ब्रज जन मन सुखकारी राधे, श्याम श्यामा श्याम राधे.....

राधे गोविन्दा……….

हरे कृष्ण हरे कृष्ण,

कृष्ण कृष्ण हरे हरे,

हरे राम हरे राम,

राम राम हरे हरे॥

हरे कृष्ण हरे कृष्ण,

कृष्ण कृष्ण हरे हरे,

हरे राम हरे राम,

राम राम हरे हरे॥

हरे कृष्ण हरे कृष्ण,

कृष्ण कृष्ण हरे हरे,

हरे राम हरे राम,

राम राम हरे हरे॥

हरे कृष्ण हरे कृष्ण,

कृष्ण कृष्ण हरे हरे,

हरे राम हरे राम,

राम राम हरे हरे॥

हरे कृष्ण हरे कृष्ण,

कृष्ण कृष्ण हरे हरे,

हरे राम हरे राम,

राम राम हरे हरे॥

हरे कृष्ण हरे कृष्ण,

कृष्ण कृष्ण हरे हरे,

हरे राम हरे राम,

राम राम हरे हरे॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।