राणा जी तेरे महलो में आग लगे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

राणाजी तेरे महलो में आग लगे,

राणाजी तेरे महलो मे आग लगे,

मै तो चली गोवर्धन राणा,

मै तो चली वृन्दावन राणा,

मेरे सोये भाग जगे,

राणाजी तेरे महलो मे आग लगे।।

घास फुस की कुटिया बनाउँगी,

सांवरिया का वामे मंदिर बनाउँगी,

वहाँ पे तुलसी के बाग लगे,

राणाजी तेरे महलो मे आग लगे।।

ना चाहिए तेरे सोना चाँदी,

ना चाहिए तेरे हीरे मोती,

ये तो गहरा घाव लगे,

राणाजी तेरे महलो मे आग लगे।।

गोविन्दजी का नाम जपुंगी,

राधे राधे श्याम रटुंगी,

चाहे गहरा दाग लगे,

राणाजी तेरे महलो मे आग लगे।।

राणाजी तेरे महलो में आग लगे,

राणाजी तेरे महलो मे आग लगे,

मै तो चली गोवर्धन राणा,

मै तो चली वृन्दावन राणा,

मेरे सोये भाग जगे,

राणाजी तेरे महलो मे आग लगे।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।