तेरी चौखट पे जन्नत का नज़ारा हमने देखा है,

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरी चौखट पे जन्नत का,

नज़ारा हमने देखा है,

कहा कब हो रहा किससे,

इशारा हमने देखा है,

मेरे दो नैन है लेकिन,

तुम्हे लाखो मे देखा है,

बदनसीबो के हाथो की,

बदल देती तू रेखा है,

सोई किस्मत जहाँ जगती,

वो द्वारा हमने देखा है,

तेरी चोखट पे जन्नत का,

नज़ारा हमने देखा है,

मेरा दो दिन का ये जीवन,

तेरी पूजा के लिए कम है,

ना छोडूंगा माँ तेरा दामन,

जब तक दम में दम है,

तेरे दर पे ग़रीबो का,

गुज़ारा हमने देखा है,

तेरी चोखट पे जन्नत का,

नज़ारा हमने देखा है,

निगाहे ज़र्रे ज़र्रे पे,

रहे तेरी निरंतर माँ,

भिखारी हो या राजा हो,

कभी करती ना अंतर माँ,

कश्तियों को कहाँ मिलता,

किनारा हमने देखा है,

तेरी चोखट पे जन्नत का,

नज़ारा हमने देखा है,

तेरी चौखट पे जन्नत का,

नज़ारा हमने देखा है,

तेरी चोखट पे जन्नत का,

नज़ारा हमने देखा है,

कहा कब हो रहा किससे,

इशारा हमने देखा है,

तेरी चोखट पे जन्नत का,

नज़ारा हमने देखा है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।