महिमा तेरी है अपरंपार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

शेरावाली जय हो,

ज्योतावली जय हो,

मेहरावाली जय हो,

पहाड़ावाली जय हो,

रात जगी हैं ज्योत जली हैं,

मैया के दरबार में,

किस्मत वाला मैं भी खड़ा हूँ,

भक्तों की कतार में,

जय माता दी……

ओ शेरावाली मैया तूने दिया है,

जो भी है माँगा हर बार,

महिमा तेरी हैं अपरंपार,

दिया ही नहीं है मैया,

तूने लुटाया हैं,

दिया ही नहीं है मैया,

तूने लुटाया हैं,

ममता का सारा भंडार,

महिमा तेरी है अपरंपार,

साचा है तेरा दरबार,

महिमा तेरी है अपरंपार,

जय माता दी……

शान तेरी ऊँची है ऊँचे ही परबत पे

दरबार तेरा ज्योतावालीये

पोड़ी पोड़ी चढ़के तेरे दरबार आता है

संसार सारा शेरावालिए

तेरा हर एक बच्चा माँ है तुझे प्यारा

और हम बच्चो को प्यारा तेरा जयकारा

जय माता दी

टली मुश्किलें है मैया जब भी किया है

टली मुश्किलें है मैया जब भी किया है

तेरा जयकारा इक बार

महिमा तेरी है अपरंपार,

जय माता दी……

रात जगी है ज्योत चली हैं,

मैया के दरबार मैं,

किस्मत वाले हम भी खड़े हैं,

भक्तो की क़तार में,

सर्व शक्तिशाली माँ तू त्रिशूल वाली माँ,

भक्तो की रक्षा करनेवाली माँ,

तेरे सभी रूपों में नित्य तू निराली माँ,

तू ही लक्ष्मी तू ही काली माँ,

माँ तेरा दर्शन जाए,

ना कभी खाली,

सबको दया बरसाती हैं,

तू मेहरावाली,

जय माता दी,

जब जब अटकी नैया तूने किया हैं,

जब जब अटकी नैया तूने किया हैं,

तब तब मेरा बेड़ापार,

महिमा तेरी है अपरंपार,

जय माता दी……

मेरा मन तो करता हैं तेरे ही चरणों में,

इन ही पहाड़ो में बस जाऊँ,

खड़ा रहु यु ही माँ,

रोज इन कतारों में,

रोज तेरा दर्शन यु ही पाऊ,

तेरी प्यारी सूरत माँ,

आँखों में बसाऊ,

ज्योत तेरी भक्ति की माँ,

मन में जलाऊ,

जय माता दी,

हरसू तेरा ही मैया दर्शन किया है,

हरसू तेरा ही मैया दर्शन किया है,

सब जग तेरी सरकार,

महिमा तेरी है अपरंपार,

जय माता दी,

साँचा है तेरा दरबार,

महिमा तेरी है अपरंपार,

जय माता दी……

रात जगी हैं ज्योत जली हैं,

मैया के दरबार में,

किस्मत वाला मैं भी खड़ा हूँ,

भक्तों की कतार में,

जय माता दी……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।