ओ मेरे कान्हा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

राधे तू बड़ भागिनी, कौन तपस्या कीन,

तीन लोक तारण तरण सो तोरे आधीन

एक ना त्यागे दुनिया दारी

वो मीरा केहलाई

दूजी राधा रानी बनके

श्याम सलोना पाई

मुझको भी तू अपना ले

मन वृंदावन बन जाए

मुझमे तू ही बस जाए

और मन तुझमे रम जाए

ओ मेरे कान्हा

ओ मेरे कान्हा

ओ मेरे कान्हा

ओ मेरे कान्हा.....

जय जय राधा रमन हरी बोल,

जय जय राधा रमन हरी बोल,

जय जय राधा रमन हरी बोल,

जय जय राधा रमन हरी बोल……

धड़कन धड़कन राधिका,

नस नस उड़ती प्रीत,

बरसाने में गूँजता,

मुरली का संगीत……

ओ मेरे कान्हा सब जन जापी,

तेरो नाम ही सुबहो शाम,

जो मन वैरागी ठेहरे,

कान्हा उनमे खुद छुप जाएगा,

ओ मेरे कान्हा,

ओ मेरे कान्हा,

ओ मेरे कान्हा,

ओ मेरे कान्हा….

गोरे मुख पे टील बने,

दाही करो प्रणाम,

मानो चाँद बिछाई के,

पोढे सालक राम…….

है दिखता जुगनू जग मग,

सूरज चाँद खुद से चमके ऐसे,

खुद से चमके ऐसे,

हाँ के मिलता कण कण में कान्हा,

का दर्शन हर गोपी को जैसे,

हर गोपी को जैसे,

ओ मेरे कान्हा तेरा सेवक करता,

तुझसे ही दरकार,

ये धरती तुझे घूमे,

नम चूमे है कदम तेरे सरकार,

ओ मेरे कान्हा,

ओ मेरे कान्हा,

ओ मेरे कान्हा,

ओ मेरे कान्हा……..

जय जय राधा रमन हरी बोल,

जय जय राधा रमन हरी बोल,

जय जय राधा रमन हरी बोल,

जय जय राधा रमन हरी बोल…..

जय जय राधा रमन हरी बोल,

जय जय राधा रमन हरी बोल,

जय जय राधा रमन हरी बोल,

जय जय राधा रमन हरी बोल….

जय जय राधा रमन,

जय जय राधा रमन,

जय जय राधा रमन,

जय जय राधा रमन……

जय जय राधा रमन,

जय जय राधा रमन……….

हरी बोल हरी बोल,

हरी बोल हरी बोल,

हरी बोल हरी बोल,

हरी बोल हरी बोल………

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।