आया है होली पे राधेश्याम

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आया है होली पे, राधेश्याम,

तुम्हारा आया रे, आया रे,

तुझको रंग लगाने,

कहाँ छुपी है तू राधे,

आया है होली पे, राधेश्याम,

तुम्हारा आया रे, आया रे…….

सबने एक दूजे को रंग है लगाया,

तुझको रंगने मैं, तेरे बरसाने आया,

आकर अपने कान्हां को,

तू तो रंग लगा दे,

आया है होली पे, राधेश्याम,

तुम्हारा आया रे, आया रे……….

चारों तरफ रंगों की, बरखा है आई,

ऐसे में मेरी आँखें भर आई,

अपने कान्हा पर तू,

प्रेम का रंग बरसा दे,

आया है होली पे, राधेश्याम,

तुम्हारा आया रे, आया रे………..

तेरे बिना होली, फ़ीकी लगती है,

ढूँढा बहुत तुझको,

पर तू नहीं दिखती है,

तुझ बिन रंग लगाउ,

किसको बता दे राधे,

आया है होली पे, राधेश्याम,

तुम्हारा आया रे, आया रे,

आया है होली पे, राधेश्याम,

तुम्हारा आया रे, आया रे,

तुझको रंग लगाने,

कहाँ छुपी है तू राधे,

आया है होली पे, राधेश्याम,

तुम्हारा आया रे, आया रे………..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।