मैया मैंने दो दो कुल अपनाए

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ओ मैया मैंने दो दो कुल अपनाए,

तन मन धन सब कर दिया अर्पण वह मेरे ना हो पाए,

ओ मैया मैंने दो दो कुल अपनाए....

एक कुल में मैंने जन्म लिया है,

बीस बरस वहां मैंने बिताऐ,

ऐसे हो गए वह निर्मोही भेज के देश पराए,

ओ मैया मैंने दो दो कुल अपनाएं....

एक कुल में मैं ब्याह के आई,

सब अनजाने मैंने अपनाए,

तन मन धन से करी है सेवा सबके हुक्म बजाएं,

ओ मैया मैंने दो दो कुल अपनाए.....

बेटी से फिर बहू बनी में,

मां बनकर मैंने लाड लड़ाए,

मेरे मन की कोई सुने ना नैना नीर बहाए,

ओ मैया मैंने दो दो कुल अपनाए.....

मां बाबुल का मान बढ़ाया,

सास ससुर का वंश चलाया,

जब मां मुझको पड़ी जरूरत लगने लगे पराए,

ओ मैया मैंने दो दो कुल अपनाए....

हर बेटी की यही कहानी,

यूं तो है यह सदियों पुरानी,

बहुत तो घर की होती लक्ष्मी कोई क्यों ना लाड लड़ाए,

ओ मैया मैंने दो‌ दो कुल अपनाए......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।