तेरे नित दे उलाम्बे आऊदे ओ वृन्दावन रहन वालैया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरे नित दे उलाम्बे आऊदे,

ओ वृन्दावन रहन वालैया,

ओ राधे राधे कहन वालैया....

पहला उलाम्बा तेरा गोकुल तो आया,

गोकुल तो आया श्याम गोकुल तो आया,

वे तु सखिया दी मटकी गिरावे,

ओ वृन्दावन रहन वालैया,

तेरे नित.........

दूजा उलाम्बा तेरा यमुना तो आया,

यमुना तो आया श्याम यमुना तो आया,

वे तु सखिया दे चीर चुरावे,

ओ वृन्दावन रहन वालैया,

तेरे नित........

तीजा उलाम्बा तेरा मथुरा तो आया,

मथुरा तो आया श्याम मथुरा तो आया,

वे तु सखिया दा मखन चुरावे,

ओ वृन्दावन रहन वालैया,

तेरे नित.........

चौथा उलाम्बा तेरा बरसाने तो आया,

बरसाने तो आया श्याम बरसाने तो आया,

वे तु राधा नाल रास रचावे,

ओ वृन्दावन रहन वालैया,

तेरे नित..........

पंजवा उलाम्बा तेरी गोपिया दा आया,

गोपिया दा आया श्याम गोपिया दा आया,

वे तु गोपिया दे दिल नु चुरावे,

ओ वृन्दावन रहन वालैया,

तेरे नित..........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।