दुख मेरे हरो

मीरा बाई
श्री गणेश भजन शिव भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

चंदन चावल बेल की पतिया,

शिव जी के माथे धरो, हे भोलानाथ दिगंबर,

ये दुख मेरे हरो, हरो रे....

अगर चंदन का बश्म चढ़ाउ, शिव जी के पैयाँ पडु,

नंदी उपर स्वार भयो रामा, मस्तक गंगा धरो,

ये दुख मेरे हरो......

शिव शंकर जी को तीन नेत्र हैं, अद्भुत रूप धरो,

अर्धंगी गौरी पुत्र गजानन, चंद्रमा माथे धरो,

ये दुख मेरे हरो…

आसन दाल सिंहासन बैठे, शांति समाधि धरो,

कंचन थाल कपूर की बाती, शिव जी की आरती करो,

ये दुख मेरे हरो…..

मीरा के प्रभु गिरधरनागर चरणो में शीश धरो,

हे भोलानाथ दिगंबर मोरे, ये दुख मोरे हरो,

सब दुख मोरे हरो.....

चंदन चावल बेल की पतिया, शिव जी के माथे धरो,

हे भोलानाथ दिगंबर सब दुख मोरे हरो रे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।